मैंने भरी दोपहरी में दीप जलते देखा हैमैंने देखा है भूरी चिड़िया को उड़ना भूलतेमैंने शीशमहल का कोहराता सुनापन देखा हैमैंने देखा है दक्ष उंगलियों को लिखना भूलतेमैंने होठों पे कांच सुलगते देखा हैमैंने देखा है दिलों को नफ़रत सीखतेमुझसे मत पूछो मेरी आँखें उदास क्यों है ~ Wrote it a while back